बरेली। जिले में किसानों को निःशुल्क मूंगफली बीज उपलब्ध कराने की सरकारी योजना को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। भारतीय किसान यूनियन लोक शक्ति ने मूंगफली बीज वितरण में कथित अनियमितताओं और घोटाले का आरोप लगाते हुए पूरे मामले की उच्च स्तरीय एवं निष्पक्ष जांच की मांग की है। यूनियन की ओर से इस संबंध में जिलाधिकारी बरेली को ज्ञापन सौंपा गया है।
किसान संगठन का आरोप है कि सरकार की योजना के तहत किसानों को मिलने वाला निःशुल्क मूंगफली बीज कागजों में वितरित दिखाया गया, लेकिन जमीनी स्तर पर कई पात्र किसानों तक इसका लाभ नहीं पहुंच सका। संगठन ने वितरण प्रक्रिया की जांच कर यह पता लगाने की मांग की है कि योजना के तहत कितना बीज उपलब्ध कराया गया, किन किसानों के नाम पर उसका वितरण दर्ज किया गया और वास्तविक रूप से कितने किसानों को बीज मिला।
14 विकासखंडों में जांच की मांग
भारतीय किसान यूनियन लोक शक्ति के मुताबिक, नवाबगंज विकासखंड को छोड़कर बरेली जनपद के शेष 14 विकासखंडों में निःशुल्क मूंगफली बीज वितरण को लेकर कथित अनियमितताएं सामने आई हैं। संगठन ने इन सभी विकासखंडों में वितरण से जुड़े रिकॉर्ड की जांच कराने की मांग की है। यूनियन का कहना है कि जांच के दौरान लाभार्थी किसानों की सूची, वितरण रजिस्टर, बीज की उपलब्धता और वितरण से संबंधित दस्तावेजों का मिलान कराया जाना चाहिए। साथ ही यह भी जांच होनी चाहिए कि जिन किसानों के नाम पर बीज वितरित दिखाया गया है, उन्हें वास्तव में बीज मिला था या नहीं।
जिलाधिकारी को सौंपा ज्ञापन, SIT जांच की मांग
मामले को लेकर किसान संगठन के प्रतिनिधियों ने जिलाधिकारी बरेली को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच के लिए SIT या किसी उच्च स्तरीय जांच टीम का गठन करने की मांग की गई है। संगठन ने आरोप लगाया कि यदि सरकारी योजना के तहत किसानों के लिए उपलब्ध कराए गए बीज के वितरण में किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई है तो उसकी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। यूनियन ने जांच के बाद दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों, कर्मचारियों या अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है।
जांच के बाद सामने आएगी वास्तविक स्थिति
मूंगफली बीज वितरण को लेकर लगाए गए आरोपों की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल किसान संगठन ने पूरे मामले की पारदर्शी जांच कराने पर जोर दिया है। यदि उच्च स्तरीय जांच होती है तो सरकारी रिकॉर्ड और जमीनी स्तर पर किसानों को मिले लाभ का मिलान किया जा सकता है। किसान संगठन का कहना है कि सरकारी योजनाओं का उद्देश्य किसानों को सीधे लाभ पहुंचाना है। ऐसे में यदि किसी योजना का लाभ पात्र किसानों तक नहीं पहुंचता है या रिकॉर्ड में वितरण दिखाकर वास्तविक लाभार्थियों को वंचित किया जाता है तो इसकी गंभीरता से जांच आवश्यक है।
अब इस मामले में प्रशासन की ओर से जांच और कार्रवाई को लेकर क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर किसानों और किसान संगठन की नजर बनी हुई है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मूंगफली बीज वितरण में वास्तव में कोई अनियमितता हुई थी या नहीं और यदि हुई तो इसके लिए कौन जिम्मेदार है।

