देश में इस बार मानसून दक्षिण भारत की तुलना में पूर्वोत्तर दिशा से अधिक तेजी से आगे बढ़ रहा है। मंगलवार को इसकी सक्रियता पश्चिम बंगाल तक पहुंच गई, जबकि अब इसका अगला पड़ाव बिहार माना जा रहा है। मौसम विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगले एक-दो दिनों में मानसून बिहार में प्रवेश कर सकता है, जिसके बाद उत्तर प्रदेश में भी इसके प्रभाव दिखाई देने लगेंगे।
पूर्वोत्तर भारत से बढ़ रही मानसूनी गतिविधियों को देखते हुए संभावना जताई जा रही है कि इस बार मानसून उत्तर प्रदेश में पारंपरिक मार्ग सोनभद्र के बजाय गोरखपुर और बलिया जैसे उत्तरी जिलों के रास्ते प्रवेश कर सकता है। मौसम विभाग के अनुसार, यदि वर्तमान गति बनी रही तो मानसून प्रदेश में सामान्य समय से पहले पहुंच सकता है। आमतौर पर यूपी में मानसून 18 से 20 जून के बीच प्रवेश करता है।
इस वर्ष मानसून की रफ्तार और सक्रियता में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है। इससे किसानों के बीच अच्छी बारिश और बेहतर फसल उत्पादन की उम्मीद जगी है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर मानसून आने से खरीफ फसलों की बुवाई को फायदा मिलेगा और उत्पादन में भी सुधार हो सकता है।
मौसम विभाग का मानना है कि मानसून की मजबूत गतिविधियां जलाशयों, नदियों और भूजल स्तर को भी बेहतर बनाने में मदद करेंगी। इससे उन क्षेत्रों को राहत मिल सकती है जहां गर्मी के मौसम में पानी की कमी की समस्या रहती है।
विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि मानसून के संभावित मार्ग में बदलाव मौसम के बदलते पैटर्न की ओर संकेत करता है। इसके पीछे जलवायु परिवर्तन को भी एक महत्वपूर्ण कारण माना जा रहा है।
विभाग ने बताया कि मानसून के आगे बढ़ने के साथ कई क्षेत्रों में बारिश की संभावना बढ़ गई है। पश्चिम बंगाल और बिहार के कुछ हिस्सों में वर्षा को लेकर अलर्ट जारी किया गया है, जबकि उत्तर प्रदेश के कई जिलों में भी आने वाले दिनों में बारिश हो सकती है।
किसान संगठनों ने मानसून की प्रगति को सकारात्मक संकेत बताया है। उनका मानना है कि यदि बारिश संतुलित और समय पर होती है तो इससे खेती-किसानी को बड़ा लाभ मिलेगा और कृषि उत्पादन में वृद्धि देखने को मिल सकती है।

