बरेली: बरेली पुलिस ने साइबर अपराध से निपटने के लिए नई रैंकिंग व्यवस्था शुरू की है, जिसमें बेहतर रिकवरी कराने वाली टीमों को प्रोत्साहित किया जाएगा। साइबर ठगी के मामलों में अब सिर्फ एफआईआर दर्ज करना ही पुलिस की कार्रवाई का पैमाना नहीं होगा।
इस नई व्यवस्था के तहत साइबर ठगी के मामलों में कार्रवाई के साथ-साथ पीड़ितों की रकम वापस कराने पर विशेष जोर दिया जाएगा। यानी किसी मामले में मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस ने ठगी की रकम को कितनी जल्दी ट्रेस किया, खातों में होल्ड कराया और पीड़ित को रकम वापस दिलाने की दिशा में कितना प्रभावी काम किया—इन सभी पहलुओं को प्रदर्शन का हिस्सा बनाया जाएगा।
टॉप-3 टीमों को मिलेगा इनाम
नई रैंकिंग व्यवस्था में बेहतर प्रदर्शन करने वाली पुलिस टीमों को प्रोत्साहित करने की भी व्यवस्था की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, रैंकिंग में टॉप-3 स्थान हासिल करने वाली टीमों को इनाम दिया जाएगा। वहीं खराब प्रदर्शन करने वाली टीमों पर कार्रवाई की जा सकती है। इस व्यवस्था का उद्देश्य पुलिसकर्मियों के बीच साइबर अपराध के मामलों में त्वरित कार्रवाई और अधिक से अधिक धनराशि की रिकवरी को लेकर प्रतिस्पर्धा बढ़ाना है।
बरेली पुलिस की यह पहल ऐसे समय में सामने आई है जब साइबर ठगी के मामले लगातार चुनौती बने हुए हैं। इससे पहले बरेली रेंज में छह महीने की अवधि में साइबर अपराध से जुड़े 506 मामले दर्ज हुए थे। पुलिस ने 72 आरोपियों को गिरफ्तार किया और 7.24 करोड़ रुपये की ठगी की रकम को संबंधित खातों में होल्ड कराया था। इसी अवधि में करीब एक करोड़ रुपये पीड़ितों को वापस भी कराए गए थे।
शिकायत में देरी पड़ सकती है भारी
हाल के मामलों में भी पुलिस की त्वरित कार्रवाई से पीड़ितों की रकम होल्ड कराने के उदाहरण सामने आए हैं। जून 2026 में बरेली के एक स्कूल संचालक से करीब 49.43 लाख रुपये की साइबर ठगी के मामले में पुलिस ने 30 लाख रुपये होल्ड कराए थे। साइबर ठगी के मामलों में पुलिस लगातार लोगों से तत्काल शिकायत करने की अपील करती है। ठगी का पता चलते ही 1930 साइबर हेल्पलाइन पर सूचना देने और संबंधित बैंक को जानकारी देने से रकम को समय रहते होल्ड कराने की संभावना बढ़ जाती है।
नई रैंकिंग व्यवस्था से पुलिस का फोकस केवल मुकदमा दर्ज करने के बजाय ठगी की रकम की रिकवरी और पीड़ित को राहत पहुंचाने पर बढ़ने की उम्मीद है। वहीं खराब प्रदर्शन पर कार्रवाई की व्यवस्था होने से संबंधित टीमों की जवाबदेही भी तय होगी। बरेली पुलिस की यह नई पहल साइबर अपराध के मामलों में ‘एफआईआर कितनी हुई’ से आगे बढ़कर ‘पैसा कितना वापस कराया गया’ पर फोकस करती नजर आ रही है।

