BRICS Summit 2026: आज की वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था में BRICS का नाम लगातार महत्वपूर्ण होता जा रहा है। कभी केवल चार उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए इस्तेमाल होने वाला यह शब्द अब एक बड़े बहुपक्षीय समूह का रूप ले चुका है। भारत, चीन, रूस, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका के साथ अब समूह में कई नए देश शामिल हो चुके हैं।
ऐसे में सवाल उठता है कि BRICS क्या है, इसकी शुरुआत कैसे हुई, इसका उद्देश्य क्या है और भारत के लिए इसकी अहमियत क्यों है? BRICS क्या है? BRICS उभरती और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं का एक बहुपक्षीय समूह है। इसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच आर्थिक, वित्तीय, राजनीतिक, तकनीकी और सामाजिक सहयोग को बढ़ावा देना है।
BRICS को मुख्य रूप से संवाद, सहयोग और वैश्विक संस्थाओं में विकासशील देशों की भूमिका मजबूत करने का मंच है। इसके एजेंडे में व्यापार, निवेश, ऊर्जा, तकनीक, स्वास्थ्य, शिक्षा, सतत विकास और वैश्विक शासन जैसे विषय शामिल हैं। भारत सरकार के अनुसार, BRICS अब 11 सदस्य देशों का समूह है—ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया।
BRICS नाम कैसे पड़ा?
BRICS की कहानी केवल किसी संगठन के बनने से नहीं, बल्कि एक आर्थिक विचार से शुरू हुई थी। साल 2001 में Goldman Sachs के अर्थशास्त्री जिम ओ’नील ने BRIC शब्द का इस्तेमाल ब्राजील, रूस, भारत और चीन जैसी तेजी से उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए किया था। उस समय यह किसी औपचारिक अंतरराष्ट्रीय संगठन का नाम नहीं था। इसके बाद इन देशों के बीच आपसी संवाद बढ़ा और 2006 में BRIC देशों ने औपचारिक रूप से समूह के रूप में सहयोग शुरू किया। वर्ष 2009 में रूस के येकातेरिनबर्ग में पहला BRIC शिखर सम्मेलन हुआ।
BRICS का मुख्य उद्देश्य क्या है?
BRICS का मूल उद्देश्य सदस्य देशों के बीच सहयोग को मजबूत करना और वैश्विक स्तर पर विकासशील देशों की आवाज को अधिक प्रभावी बनाना है। इसके प्रमुख क्षेत्रों में शामिल हैं: आर्थिक और व्यापारिक सहयोग निवेश और वित्तीय सहयोग तकनीक और नवाचार ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा स्वास्थ्य और शिक्षा जलवायु एवं सतत विकास वैश्विक शासन में सुधार सदस्य देशों के बीच लोगों का आपसी संपर्क BRICS के काम को मोटे तौर पर तीन प्रमुख क्षेत्रों में देखा जाता है—राजनीतिक एवं सुरक्षा सहयोग, आर्थिक एवं वित्तीय सहयोग तथा सांस्कृतिक एवं लोगों के बीच संपर्क।
BRICS ने अब तक क्या हासिल किया?
BRICS की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में New Development Bank (NDB) की स्थापना शामिल है। इसका उद्देश्य विकासशील देशों में बुनियादी ढांचे और सतत विकास से जुड़ी परियोजनाओं के लिए वित्त उपलब्ध कराना है। इसके अलावा BRICS देशों ने आपसी व्यापार, स्थानीय मुद्राओं में लेनदेन, वित्तीय सहयोग, डिजिटल अर्थव्यवस्था और विभिन्न विकास क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की कोशिश की है। हालांकि, BRICS को एक ऐसा संगठन नहीं माना जा सकता जिसमें हर मुद्दे पर सभी सदस्य देशों की एक जैसी राय हो। सदस्य देशों के राजनीतिक और आर्थिक हित कई बार एक-दूसरे से अलग भी होते हैं। यही कारण है कि संगठन के भीतर सहमति बनाना इसकी बड़ी चुनौती है।
BRICS में भारत की क्या भूमिका है?
भारत BRICS का संस्थापक सदस्य है और शुरुआत से ही समूह की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है। भारत का जोर इस बात पर रहा है कि BRICS में आर्थिक विकास, तकनीक, स्वास्थ्य, शिक्षा, व्यापार और सतत विकास जैसे व्यावहारिक मुद्दों पर सहयोग बढ़ना चाहिए। भारत की भूमिका इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वह एक तरफ BRICS में चीन और रूस जैसे देशों के साथ काम करता है, तो दूसरी तरफ अमेरिका, यूरोप, जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के साथ भी अपने रणनीतिक और आर्थिक संबंध बनाए हुए है। इस वजह से भारत BRICS के भीतर संवाद और संतुलन बनाने वाली भूमिका निभाने की कोशिश करता है।
2026 में भारत के लिए क्यों खास है BRICS?
1 जनवरी 2026 को भारत ने BRICS की अध्यक्षता संभाली। यह भारत की चौथी BRICS Chairship है। इसी वर्ष भारत 18वें BRICS Summit की मेजबानी कर रहा है। सम्मेलन 12-13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित हो रहा है। BRICS की शुरुआत चार उभरती अर्थव्यवस्थाओं के एक आर्थिक विचार से हुई थी, लेकिन दो दशकों में यह एक बड़े वैश्विक बहुपक्षीय मंच में बदल चुका है। इसका विस्तार बताता है कि विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाएं वैश्विक फैसलों में अपनी भूमिका बढ़ाना चाहती हैं।
भारत के लिए BRICS आर्थिक सहयोग के साथ-साथ कूटनीतिक संतुलन, ग्लोबल साउथ की आवाज और बहुपक्षीय व्यवस्था में अधिक प्रभाव का महत्वपूर्ण मंच है। 2026 में भारत की अध्यक्षता इस भूमिका को और महत्वपूर्ण बनाती है।

