बरेली : बरेली के 108वें उर्स-ए-रज़वी से इस बार सांप्रदायिक सौहार्द और आपसी सम्मान का एक खास संदेश सामने आया। पहली बार उर्स में सभी लंगर पूरी तरह शाकाहारी रखे गए। आयोजकों ने बताया कि सावन माह और कांवड़ यात्रा के दौरान हिंदू श्रद्धालुओं की भावनाओं का सम्मान करते हुए यह फैसला लिया गया।
लंगर में पनीर-मटर बिरयानी, दाल, सब्जी और अन्य शाकाहारी व्यंजन परोसे गए, जिन्हें लाखों जायरीन ने श्रद्धा के साथ ग्रहण किया। इस पहल की विभिन्न वर्गों में सराहना हो रही है। लोगों का कहना है कि यह फैसला केवल भोजन बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि एक-दूसरे की आस्था का सम्मान करने और सामाजिक सद्भाव को मजबूत करने का संदेश भी देता है। उर्स में पहुंचे श्रद्धालुओं ने इसे गंगा-जमुनी तहज़ीब और हिंदू-मुस्लिम एकता की सुंदर मिसाल बताया।
आयोजकों का कहना है कि समाज में प्रेम, भाईचारे और पारस्परिक सम्मान की भावना सबसे बड़ी ताकत है। जब विभिन्न समुदाय एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान करते हैं, तो सामाजिक सौहार्द और मजबूत होता है। बरेली के इस उर्स की यह पहल अब देशभर में चर्चा का विषय बनी हुई है और इसे सामाजिक समरसता की सकारात्मक मिसाल के रूप में देखा जा रहा है।
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