सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि दिल्ली सहित विभिन्न राज्यों में छात्र आंदोलनों और विरोध-प्रदर्शनों के दौरान दर्ज एफआईआर को वापस लेने का निर्णय संबंधित राज्य सरकारों के अधिकार क्षेत्र में आता है। अदालत ने कहा कि इस विषय पर वह सीधे कोई आदेश जारी नहीं कर सकती।
मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने 28 जुलाई को हुई सुनवाई के दौरान उन याचिकाओं पर विचार किया, जिनमें प्रदर्शन में शामिल विद्यार्थियों के खिलाफ दर्ज मामलों को रद्द करने की मांग की गई थी। याचिकाओं में दिल्ली और अन्य राज्यों में 2020 से जुड़े विरोध-प्रदर्शनों के दौरान छात्रों के विरुद्ध दर्ज आपराधिक मामलों को समाप्त करने की अपील की गई थी।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि प्रदर्शन के समय कुछ पुलिस अधिकारियों द्वारा अत्यधिक बल प्रयोग किया गया। इस पर अदालत ने कहा कि पुलिस की कथित कार्रवाई की निष्पक्ष जांच के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में स्वतंत्र समिति गठित करने की मांग पर भी विचार किया जा रहा है।
अब इस मामले की अगली सुनवाई 18 अगस्त को निर्धारित की गई है।

