लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश में खिलौना उद्योग को संगठित क्षेत्र के रूप में विकसित करने के लिए खिलौना विनिर्माण प्रोत्साहन नीति-2025 को मंजूरी दे दी है। सरकार के इस फैसले का उद्देश्य खिलौना निर्माण से जुड़े निवेश को बढ़ावा देना, स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाना और प्रदेश में खिलौना उत्पादन का मजबूत इकोसिस्टम तैयार करना है।
नई नीति के तहत खिलौना निर्माण से जुड़ी परियोजनाओं को उनके क्षेत्र के हिसाब से जमीन खरीद पर 20 से 40 प्रतिशत तक भूमि सब्सिडी देने का प्रावधान किया गया है। बुंदेलखंड और पूर्वांचल में निवेश करने वाली इकाइयों को अधिकतम 40 प्रतिशत तक जमीन सब्सिडी का लाभ मिल सकता है। नीति की प्रभावी अवधि पांच साल रखी गई है।
वित्त मंत्री सुरेश खन्ना के अनुसार, बड़े खिलौना विनिर्माण संयंत्रों को गौतमबुद्धनगर और गाजियाबाद में भूमि लागत पर 20 प्रतिशत तक सहायता का प्रावधान है। वहीं, प्रदेश के अन्य हिस्सों में परियोजनाओं के लिए भूमि लागत की 25 प्रतिशत तक सब्सिडी, निर्धारित अधिकतम सीमा के साथ उपलब्ध होगी। नीति के जरिए सरकार का फोकस बड़े निवेश के साथ-साथ रोजगार सृजन पर भी है। बड़े स्तर पर खिलौना उद्योग विकसित होने से उत्पादन, पैकेजिंग, सप्लाई चेन और अन्य संबंधित क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है। साथ ही प्रदेश में खिलौना निर्माण के क्षेत्र में चीन सहित दूसरे देशों के उत्पादों के मुकाबले घरेलू उद्योग को मजबूत करने की दिशा में भी इसे महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
900 नए न्यायालयों की स्थापना को भी मंजूरी
कैबिनेट ने प्रदेश में 900 नए न्यायालयों की स्थापना और उनमें पदों के सृजन से संबंधित प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है। इसके तहत इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विभिन्न श्रेणियों के न्यायालयों के गठन का प्रस्ताव उपलब्ध कराया था।
सरकार के अनुसार, नए न्यायालयों की स्थापना से प्रदेश के लोगों को समय पर न्याय उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। पहले चरण में विभिन्न श्रेणियों के 900 न्यायालयों और उनसे संबंधित पदों के सृजन के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है।
मथुरा की बंद चीनी मिल में बनेगा नया प्लांट
कैबिनेट ने मथुरा की बंद छाता चीनी मिल में करीब 3.96 करोड़ लीटर क्षमता वाला डिस्टिलरी प्लांट स्थापित करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है। परियोजना पर 200 करोड़ रुपये से अधिक खर्च होने की जानकारी दी गई है।
प्रस्ताव के मुताबिक यह प्लांट करीब 11 महीने संचालन में रहेगा। इसकी वार्षिक उत्पादन क्षमता लगभग 3.96 करोड़ लीटर बताई गई है। परियोजना से बंद पड़ी औद्योगिक संपत्ति के उपयोग और स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
इसके अलावा नीति के तहत मध्यांचल में 30 प्रतिशत और बुंदेलखंड व पूर्वांचल में 40 प्रतिशत तक भूमि सब्सिडी का प्रावधान बताया गया है। बड़े निवेश वाली परियोजनाओं के लिए न्यूनतम 100 करोड़ रुपये का स्थायी पूंजी निवेश जरूरी होगा। विदेशी खिलौना निर्माताओं के साथ संयुक्त उद्यम की स्थिति में भी निर्धारित शर्तों को पूरा करना होगा।

