आम लोगों के घरेलू बजट पर महंगाई का दबाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। चीनी और चावल की कीमतों में तेजी के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में तांबे के भाव ने भी नया रिकॉर्ड बनाया है। उत्पादन, मौसम, उपलब्ध स्टॉक और बढ़ती लागत जैसे कई कारण इनकी कीमतों को प्रभावित कर रहे हैं।
त्योहारों का मौसम नजदीक आते ही घरों में खरीदारी और मिठाइयों की तैयारी शुरू हो जाती है। ऐसे समय में रोजमर्रा की जरूरत वाली चीजों के महंगे होने से परिवारों का बजट प्रभावित हो सकता है। देश के बाजारों में फिलहाल चीनी और चावल के भाव में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। वहीं, दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय बाजार में तांबे की कीमत रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। इससे आने वाले समय में खाद्य वस्तुओं के साथ-साथ कुछ औद्योगिक उत्पादों की लागत बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है।
चीनी की कीमत में लगातार बढ़ोतरी
चीनी की कीमतों में पिछले कुछ समय से तेजी देखने को मिल रही है। आंकड़ों के मुताबिक, बीते एक महीने में देश के थोक बाजार में चीनी के औसत भाव में 5 फीसदी से वृद्धि हुई है। जिसका असर खुदरा बाजार में भी नजर आ रहा है। त्योहार में चीनी की मांग आमतौर पर बढ़ जाती है। मिठाइयों के अलावा बेकरी उत्पाद और पैकेज्ड फूड तैयार करने में भी चीनी की बड़ी खपत होती है। ऐसे में अगर कीमतों में तेजी आगे भी जारी रहती है तो इसका असर उपभोक्ताओं के खर्च पर पड़ सकता है।
महाराष्ट्र और कर्नाटक में घटता स्टॉक बना चिंता का कारण
चीनी के भाव बढ़ने के पीछे का कारण महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे प्रमुख चीनी उत्पादक राज्यों में पुराने स्टॉक में कमी भी बताई जा रही है। इसके अलावा गन्ने से तैयार चीनी का इस्तेमाल इथेनॉल उत्पादन में भी बढ़ा है। इससे घरेलू बाजार के लिए उपलब्ध चीनी की मात्रा पर असर पड़ सकता है।
चावल भी हुआ महंगा
चीनी के साथ चावल के दाम में भी पिछले एक महीने में तेजी दर्ज की गई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, देश में चावल का औसत खुदरा भाव करीब 44.13 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 45.13 रुपये प्रति किलो हो गया है। इस तरह लगभग एक महीने करीब 2.27 फीसदी की वृद्धि हुई है।हालांकि राष्ट्रीय स्तर पर यह बढ़ोतरी बहुत ज्यादा नहीं दिखती, लेकिन कुछ राज्यों में चावल की कीमतों में अधिक तेजी देखी गई है। चावल देश के करोड़ों परिवारों के रोजाना भोजन का अहम हिस्सा है। ऐसे में इसकी कीमत में लगातार बढ़ोतरी का सीधा असर घर के मासिक राशन बजट पर पड़ सकता है।
मौसम की स्थिति पर टिकी नजर
चावल की कीमतों को लेकर मौसम भी अहम भूमिका निभा सकता है। कम बारिश और अल-नीनो जैसी परिस्थितियां एशिया के प्रमुख चावल उत्पादक क्षेत्रों में उत्पादन को प्रभावित कर सकती हैं।
तांबे की कीमत ने भी बनाया रिकॉर्ड
खाने-पीने की चीजों के अलावा औद्योगिक क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाली धातु तांबे की कीमत भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी से बढ़ी है। लंदन मेटल एक्सचेंज (LME) में तीन महीने की डिलीवरी वाले तांबे का भाव बढ़कर करीब 13,842 डॉलर प्रति टन तक पहुंच गया। बाढ़, सर्दियों के तूफान और भारी बर्फबारी जैसी परिस्थितियों ने खनन गतिविधियों को प्रभावित किया है।
फिलहाल त्योहारों के दौरान चीनी और अन्य खाद्य उत्पादों की मांग बढ़ने से बाजार पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। ऐसे में उपभोक्ताओं के लिए आने वाले समय में कीमतों में होने वाले बदलाव पर नजर रखना जरूरी होगा।

