बरेली। उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ ने अपनी लंबित मांगों को लेकर शासन का ध्यान आकर्षित करते हुए मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन भेजा है। लेखपाल संघ ने वेतन विसंगति दूर करने, 2800 ग्रेड-पे लागू करने, भत्तों में बढ़ोतरी और कार्यस्थलों पर जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने समेत कई मांगें उठाई हैं। संघ ने चेतावनी दी है कि मांगों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो 7 अक्टूबर 2026 से चरणबद्ध तरीके से कार्य बहिष्कार किया जाएगा।
तहसील अध्यक्ष अमित सक्सेना और तहसील मंत्री अभिषेक तोमर समेत संघ के पदाधिकारियों की ओर से दिए गए ज्ञापन में कहा गया कि लेखपाल राजस्व प्रशासन की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। लगातार बढ़ते कार्यभार और अतिरिक्त जिम्मेदारियों के बावजूद कई समस्याओं का समाधान लंबे समय से लंबित है। इससे लेखपाल संवर्ग में असंतोष बना हुआ है।
2800 ग्रेड-पे और वेतन विसंगति का मुद्दा
लेखपाल संघ ने ज्ञापन में 2800 ग्रेड-पे की मांग को प्रमुखता से उठाया। संघ का कहना है कि यह मांग लंबे समय से लंबित है। इसके साथ ही वेतन संबंधी विसंगतियों को दूर करने और लेखपालों की सेवा से जुड़ी अन्य समस्याओं का जल्द समाधान करने की मांग की गई है। संघ ने क्षेत्रीय कार्यों के दौरान होने वाले खर्च को देखते हुए यात्रा भत्ता और वाहन भत्ता बढ़ाने की मांग भी रखी है। इसके अलावा विशेष भत्ते में वृद्धि करने की मांग की गई है, ताकि फील्ड में काम करने वाले लेखपालों को बढ़ती लागत के बीच राहत मिल सके।
ग्राम सचिवालयों में सुविधाओं की मांग
ज्ञापन में ग्राम सचिवालयों में लेखपालों के लिए अलग कक्ष उपलब्ध कराने की मांग भी की गई है। संघ ने कहा कि वहां बैठने के लिए फर्नीचर, महत्वपूर्ण अभिलेखों को सुरक्षित रखने की व्यवस्था, बिजली, पेयजल और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं होनी चाहिए। लेखपालों ने काम को सुचारू तरीके से करने के लिए आवश्यक तकनीकी संसाधन और मोबाइल उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई। इसके साथ ही भूलेख कार्यालयों और विभिन्न पटलों पर संबद्ध लेखपालों को वहां से अवमुक्त करने की मांग की गई है, ताकि वे अपने मूल क्षेत्र से जुड़े राजस्व कार्यों पर अधिक प्रभावी तरीके से ध्यान दे सकें।
लंबित पदोन्नति पर भी उठी आवाज
संघ ने लंबित पदोन्नति समेत अन्य सेवा संबंधी मामलों में शीघ्र शासनादेश जारी करने की मांग की है। पदाधिकारियों का कहना है कि लेखपालों पर लगातार काम का दबाव बढ़ रहा है, इसलिए लंबित मांगों पर शासन स्तर से जल्द निर्णय लिया जाना जरूरी है। ज्ञापन के माध्यम से संघ ने स्पष्ट किया कि यदि मांगों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो 7 अक्टूबर 2026 से प्रदेशभर में चरणबद्ध तरीके से सम्पूर्ण कार्य बहिष्कार किया जाएगा।
संघ ने कहा है कि कार्य बहिष्कार की स्थिति में प्रशासनिक कार्यों और आम जनता को होने वाली असुविधा की जिम्मेदारी शासन और राजस्व परिषद की होगी। मुख्य मांगें 2800 ग्रेड-पे लागू करने और वेतन विसंगति दूर करने की मांग यात्रा, वाहन और विशेष भत्तों में बढ़ोतरी भूलेख कार्यालयों व पटलों से संबद्ध लेखपालों को अवमुक्त करना ग्राम सचिवालयों में अलग कक्ष और मूलभूत सुविधाएं तकनीकी संसाधन और मोबाइल उपलब्ध कराना लंबित पदोन्नति और अन्य मांगों पर जल्द शासनादेश जारी करना

