बरेली। अग्निवीर भर्ती में अभ्यर्थियों को पास कराने के नाम पर कथित तौर पर ठगी करने वाले एक गिरोह के खिलाफ बरेली में बड़ी कार्रवाई की गई है। कैंट पुलिस और मिलिट्री इंटेलिजेंस की संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
पुलिस के अनुसार, आरोपी भर्ती प्रक्रिया में शारीरिक नाप-तौल और मेडिकल में पास कराने का झांसा देकर अभ्यर्थियों से पैसे ऐंठने की कोशिश कर रहे थे। बताया गया कि बरेली के जाट रेजीमेंट सेंटर में अग्निवीर भर्ती प्रक्रिया चल रही थी। इसी दौरान संयुक्त टीम को कुछ लोगों द्वारा अभ्यर्थियों को भर्ती में मदद दिलाने के नाम पर संपर्क किए जाने की सूचना मिली। सूचना के आधार पर टीम ने हरभजन गेट के पास घेराबंदी कर पांच संदिग्धों को पकड़ लिया।
पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार आरोपियों की पहचान प्रदीप कुमार शर्मा, विशाल यादव, राजवीर उर्फ कैलाश, धर्मेंद्र सिंह और नूर अहमद के रूप में हुई है। तलाशी के दौरान आरोपियों के पास से छह मोबाइल फोन, 9,100 रुपये नकद, एक बाइक और एक स्कूटी बरामद होने की बात कही गई है।
मोबाइल में मिले भर्ती से जुड़े दस्तावेज
पुलिस के अनुसार, आरोपियों के मोबाइल फोन की जांच में अग्निवीर भर्ती में शामिल अभ्यर्थियों के प्रवेश पत्र, मेडिकल से संबंधित दस्तावेज, चैट और ऑनलाइन लेन-देन से जुड़े साक्ष्य मिले हैं। जांच एजेंसियां इन डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर गिरोह के संपर्क और लेन-देन की जानकारी जुटा रही हैं।
पुलिस का कहना है कि आरोपी खुद को सेना के अधिकारियों और डॉक्टरों का करीबी बताकर अभ्यर्थियों को भरोसे में लेते थे। इसके बाद उन्हें भर्ती प्रक्रिया के अलग-अलग चरणों में पास कराने का झांसा दिया जाता था।
जांच में यह भी सामने आने की बात कही गई है कि विशाल यादव और नूर अहमद पूर्व में सैन्य संस्थानों में कर्मचारी रह चुके हैं। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपियों के संपर्क में कितने अभ्यर्थी थे और इस पूरे मामले में कितने लोगों से रकम की मांग या लेन-देन किया गया।
कैंट थाने में मुकदमा दर्ज
पांचों आरोपियों के खिलाफ कैंट थाने में बीएनएस की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस के मुताबिक आरोपियों को गिरफ्तार कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
अधिकारियों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में किसी भी तरह की धोखाधड़ी या अभ्यर्थियों को झांसा देने वालों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी। पुलिस डिजिटल साक्ष्यों की जांच के साथ-साथ मामले से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही है।

