बरेली। जिले के शेरगढ़ क्षेत्र में लगातार बढ़ते जलस्तर और नदी के तेज कटान ने जल जीवन मिशन की एक महत्वपूर्ण परियोजना को भारी नुकसान पहुंचाया है। बैरमनगर गांव में किच्छा नदी के किनारे निर्माणाधीन पानी की टंकी का ढांचा कटान की चपेट में आकर नदी में समा गया। करीब 3.97 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना के नदी में जाने से निर्माण की गुणवत्ता और स्थान चयन को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
जानकारी के मुताबिक, बैरमनगर गांव में जल जीवन मिशन के तहत ओवरहेड टैंक और पाइपलाइन के जरिए ग्रामीणों तक पानी पहुंचाने की योजना पर काम चल रहा था। यह परियोजना वर्ष 2022-23 से निर्माणाधीन थी। परियोजना के तहत टैंक परिसर, पाइपलाइन, सौर ऊर्जा पैनल और अन्य जरूरी ढांचे तैयार किए जा चुके थे।
अधिकारियों ने लिया तुरंत एक्शन
नदी का बहाव और तेज होने पर परियोजना परिसर का हिस्सा भी कटान की जद में आ गया। चार सितंबर को टैंक की चहारदीवारी का एक हिस्सा नदी में समा गया था। खतरे को देखते हुए अधिकारियों ने परिसर में रखे जनरेटर, सौर ऊर्जा पैनल, पंप, डोमर और स्काडा सिस्टम समेत कई महत्वपूर्ण उपकरणों को वहां से सुरक्षित हटवा लिया था। अब ताजा स्थिति में निर्माणाधीन टंकी का ढांचा भी नदी में समा गया है। इस तरह करोड़ों रुपये की लागत से तैयार की जा रही परियोजना को बड़ा नुकसान हुआ है। हालांकि, अधिकारियों की ओर से पहले ही यह दावा किया गया था कि नदी के लगातार कटाव को देखते हुए टंकी का निर्माण करीब एक साल पहले रोक दिया गया था और भविष्य में दूसरी जगह जमीन चिन्हित कर परियोजना को आगे बढ़ाने की योजना है।
ग्रामीण क्षेत्र में उठी जांच की मांग
ग्रामीणों का कहना है कि किच्छा नदी में हर वर्ष बरसात के दौरान जलस्तर बढ़ने पर कटान होता है। ऐसे में सवाल यह है कि इतनी बड़ी पेयजल परियोजना के लिए स्थान का चयन करते समय नदी के संभावित कटाव का पर्याप्त आकलन क्यों नहीं किया गया। ग्रामीणों ने परियोजना की लागत, स्थान चयन और निर्माण प्रक्रिया की जांच की मांग भी उठाई है।
फिलहाल किच्छा नदी के बढ़ते जलस्तर और तेज कटान के कारण इलाके में खतरा बना हुआ है। करोड़ों रुपये की परियोजना के क्षतिग्रस्त होने के बाद अब प्रशासन और संबंधित विभाग के सामने नई जगह पर सुरक्षित तरीके से पानी की टंकी का निर्माण कराने की चुनौती है।

