अमेरिका और यूरोप में बढ़ी भारतीय आयुर्वेदिक उत्पादों की मांग, 2030 तक बाजार दोगुना करने का लक्ष्य

Surbhi Saxena
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नई दिल्ली। दुनिया के कई देशों में भारतीय आयुर्वेद और हर्बल उत्पादों की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। 23 सितंबर को आयुर्वेद दिवस के मौके पर सामने आई जानकारी के अनुसार, अमेरिका और यूरोप में भारतीय आयुर्वेदिक एवं हर्बल उत्पादों की मांग में लगातार इजाफा हो रहा है। चीन भी इन उत्पादों के प्रमुख निर्यात बाजारों में शामिल हो गया है।

आयुर्वेद के बढ़ते वैश्विक कारोबार का अंदाजा निर्यात के आंकड़ों से लगाया जा सकता है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत से अमेरिका को करीब 15.157 करोड़ डॉलर यानी लगभग 1,272 करोड़ रुपये के आयुर्वेदिक उत्पादों का निर्यात किया गया। इसी अवधि में जर्मनी को 6.432 करोड़ डॉलर और इटली को 3.608 करोड़ डॉलर के आयुर्वेद उत्पाद भेजे गए।

वहीं, चीन को भी करीब 1.627 करोड़ डॉलर के आयुर्वेदिक उत्पादों का निर्यात हुआ। इसके अलावा कई अन्य देशों में भी भारतीय आयुर्वेद और हर्बल उत्पादों की मांग बढ़ रही है। इससे वैश्विक बाजार में भारतीय आयुर्वेद की बढ़ती स्वीकार्यता का संकेत मिलता है।

आयुर्वेदिक उत्पादों का बढ़ता वैश्विक कारोबार

सरकार की ओर से आयुर्वेद के वैश्विक बाजार को और विस्तार देने पर जोर दिया जा रहा है। लक्ष्य है कि 2030 तक आयुर्वेद के बाजार को मौजूदा स्तर की तुलना में दोगुना किया जाए। इसके लिए देश में आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा पद्धति को साथ लेकर उपचार के प्रोटोकॉल तैयार करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, वैज्ञानिक शोध के आधार पर ऐसे उपचार प्रोटोकॉल विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है, जिनमें आयुर्वेद को आधुनिक चिकित्सा से अलग मानकर नहीं देखा जाए। खासतौर पर औषधीय पौधों से मिलने वाले प्राकृतिक तत्वों और उनके प्रभावों पर शोध को बढ़ावा देने की बात कही गई है।

आधुनिक चिकित्सा के साथ आयुर्वेद पर जोर

आयुर्वेद को आधुनिक चिकित्सा व्यवस्था के साथ जोड़कर उपचार के नए मॉडल तैयार करने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर आयुर्वेदिक उपचार की उपयोगिता को बेहतर तरीके से स्थापित करना और इसके दायरे को बढ़ाना है। सरकार के अनुसार, बढ़ते वैश्विक रुझान के बीच भारतीय आयुर्वेदिक और हर्बल उत्पादों के लिए विदेशों में नए बाजार तैयार हो रहे हैं। अमेरिका और यूरोप के साथ चीन जैसे देशों में बढ़ती मांग भारतीय आयुर्वेदिक उत्पादों के निर्यात के लिए महत्वपूर्ण अवसर के रूप में देखी जा रही है।

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