बरेली। उत्तर प्रदेश की राजनीति में बरेली को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने एक बड़ा फैसला लिया है। भाजपा ने उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के लिए घोषित अपनी आठ उम्मीदवारों की सूची में बरेली से जुड़े धर्मपाल सिंह और श्रुति गंगवार को जगह दी है। खास बात यह है कि एक ही जिले से एक साथ दो नेताओं को राज्यसभा के लिए आगे बढ़ाए जाने को क्षेत्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।
दोनों नामों के पीछे अलग-अलग राजनीतिक आधार और सामाजिक समीकरण दिखाई देते हैं। एक ओर आंवला से लंबे समय से सक्रिय धर्मपाल सिंह हैं, तो दूसरी ओर पूर्व केंद्रीय मंत्री और बरेली के आठ बार सांसद रहे संतोष गंगवार की बेटी श्रुति गंगवार को पार्टी ने उच्च सदन की राजनीति में आगे बढ़ाया है। ऐसे में भाजपा के इस फैसले को सिर्फ दो नेताओं को टिकट देने के तौर पर नहीं, बल्कि रुहेलखंड में अपने सामाजिक और संगठनात्मक आधार को मजबूत करने की रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है।
धर्मपाल सिंह के जरिए लोधी समीकरण पर फोकस
धर्मपाल सिंह आंवला विधानसभा क्षेत्र से लंबे समय से भाजपा की राजनीति का प्रमुख चेहरा रहे हैं। वह पांच बार विधायक रह चुके हैं और मौजूदा योगी सरकार में पशुधन एवं दुग्ध विकास विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। पार्टी संगठन में भी उनका लंबा अनुभव रहा है। राज्यसभा के लिए उनका चयन पश्चिमी उत्तर प्रदेश और रुहेलखंड में लोधी समाज के राजनीतिक प्रतिनिधित्व के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
बरेली के अलावा बदायूं, एटा और कासगंज जैसे जिलों में भी लोधी मतदाताओं की राजनीतिक भूमिका महत्वपूर्ण रही है। ऐसे में धर्मपाल सिंह को उच्च सदन भेजने के फैसले से भाजपा ने इस सामाजिक आधार को एक बड़ा राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है। धर्मपाल सिंह के राज्यसभा जाने की स्थिति में आंवला विधानसभा क्षेत्र की राजनीति में भी बदलाव की संभावना बन सकती है। अब वहां भाजपा के भीतर नए चेहरे और नई दावेदारियां चर्चा में आ सकती हैं।
श्रुति गंगवार के जरिए संतोष गंगवार की राजनीतिक विरासत को नया चेहरा
श्रुति गंगवार का नाम बरेली की राजनीति में पहले से चर्चा में रहा है। वह झारखंड के राज्यपाल और बरेली से आठ बार सांसद रह चुके संतोष गंगवार की बेटी हैं। श्रुति गंगवार अर्बन कोऑपरेटिव बैंक की अध्यक्ष भी रह चुकी हैं और पिछले कुछ समय से क्षेत्र में राजनीतिक एवं सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय रही हैं।
उनकी सक्रियता खासतौर पर बहेड़ी विधानसभा क्षेत्र में बढ़ी थी। माना जा रहा था कि आगामी विधानसभा चुनाव में वह यहां से भाजपा की संभावित दावेदार हो सकती हैं। लेकिन राज्यसभा की उम्मीदवारी ने उनके राजनीतिक सफर को एक अलग दिशा दे दी है।
संतोष गंगवार लंबे समय तक बरेली की राजनीति में भाजपा के सबसे बड़े चेहरों में रहे। ऐसे में उनकी बेटी को राज्यसभा का टिकट मिलने से पार्टी ने एक तरफ गंगवार परिवार की राजनीतिक भूमिका को आगे बढ़ाया है, वहीं दूसरी ओर महिला नेतृत्व को भी मजबूत करने का संदेश दिया है।

रुहेलखंड में OBC राजनीति का बड़ा संदेश
भाजपा की इस सूची को सामाजिक समीकरणों के नजरिये से देखें तो पार्टी ने उत्तर प्रदेश में अलग-अलग वर्गों के बीच संतुलन साधने की कोशिश की है। धर्मपाल सिंह और श्रुति गंगवार दोनों का संबंध पिछड़े वर्ग की राजनीति से जोड़ा जा रहा है। इस लिहाज से बरेली से दोनों नामों का आना क्षेत्र में OBC प्रतिनिधित्व को लेकर भाजपा की रणनीति को स्पष्ट करता है।
रुहेलखंड में बरेली के साथ बदायूं, पीलीभीत और शाहजहांपुर की राजनीति में भी पिछड़ा वर्ग कई विधानसभा क्षेत्रों में निर्णायक भूमिका निभाता है। ऐसे में भाजपा का यह फैसला आने वाले विधानसभा चुनावों की तैयारियों से जोड़कर भी देखा जा रहा है। सियासी तौर पर भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती समाजवादी पार्टी के उस सामाजिक समीकरण की है, जिसमें पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वर्गों को एक साथ जोड़ने की कोशिश की जाती रही है। ऐसे में भाजपा द्वारा अपने OBC चेहरों को आगे करना संगठन के लिए चुनावी दृष्टि से महत्वपूर्ण हो सकता है।
बरेली में पहली बार दो नामों से बढ़ी राजनीतिक हलचल
बरेली से एक साथ दो नेताओं को राज्यसभा की उम्मीदवारी मिलना स्थानीय भाजपा के लिए भी बड़ा घटनाक्रम है। पार्टी के भीतर लंबे समय से अलग-अलग सामाजिक वर्गों और क्षेत्रों से संभावित नामों को लेकर चर्चा होती रही थी। लेकिन अंतिम सूची में धर्मपाल सिंह और श्रुति गंगवार के नाम आने से कई राजनीतिक समीकरण बदलते दिखाई दे रहे हैं।
खास बात यह है कि भाजपा ने इस बार उत्तर प्रदेश के अपने सभी आठ निवर्तमान राज्यसभा सदस्यों को दोबारा उम्मीदवार नहीं बनाया और उनकी जगह नए चेहरों को मौका दिया। इससे संकेत मिलता है कि पार्टी राज्यसभा के चुनाव को सिर्फ उच्च सदन की सीटों के चयन तक सीमित नहीं रख रही, बल्कि संगठन, सामाजिक समीकरण और आगामी विधानसभा चुनाव की जरूरतों को भी ध्यान में रख रही है।
आगे क्या बदलेगा?
धर्मपाल सिंह के राज्यसभा जाने से आंवला की स्थानीय राजनीति में नए चेहरे सामने आ सकते हैं, जबकि श्रुति गंगवार की उम्मीदवारी के बाद बहेड़ी विधानसभा क्षेत्र में भी भाजपा की संभावित रणनीति पर सबकी नजर रहेगी।
उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए चुनाव 16 अक्टूबर 2026 को होना है। ऐसे में भाजपा की ओर से बरेली से आए ये दोनों नाम आने वाले दिनों में रुहेलखंड की राजनीति के केंद्र में रहने वाले हैं। बरेली की राजनीति में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि राज्यसभा के लिए इन दो चेहरों के चयन के बाद आंवला और बहेड़ी में भाजपा किसे आगे करती है और 2027 के विधानसभा चुनाव में इसका असर किस तरह दिखाई देता है।

