नई दिल्ली। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में भारत के साथ सिंधु नदी के पानी और कश्मीर का मुद्दा उठाया। 25 सितंबर को न्यूयॉर्क में दिए अपने भाषण में शरीफ ने कहा कि पाकिस्तान के हिस्से के पानी को रोकने, बाधित करने या मोड़ने की किसी भी कोशिश को पाकिस्तान “युद्ध की कार्रवाई” मानेगा। शरीफ ने सिंधु नदी प्रणाली को पाकिस्तान और पूरे क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताया।
उन्होंने भारत के सिंधु जल संधि को स्थगित रखने के फैसले पर भी सवाल उठाया और कहा कि पानी को हथियार नहीं बनाया जाना चाहिए। कश्मीर को बताया पाकिस्तान की ‘गले की नस’ पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में कश्मीर का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कश्मीर विवाद के “न्यायपूर्ण और उचित समाधान” की मांग दोहराई और कश्मीर को पाकिस्तान की “jugular vein” यानी गले की नस बताया। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र से कश्मीर को लेकर अपनी पुरानी मांग पर कार्रवाई की अपील भी की।
शरीफ ने 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सैन्य टकराव का भी जिक्र किया। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके हस्तक्षेप से स्थिति और ज्यादा बिगड़ने से बची।
भारत ने UN में दिया जवाब
शहबाज शरीफ के भाषण के बाद भारत की ओर से संयुक्त राष्ट्र में राइट टू रिप्लाई के तहत जवाब दिया गया। भारत की प्रथम सचिव पेटल गहलोत ने पाकिस्तान पर सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाया और कहा कि आतंकवाद के ऐसे कृत्यों के परिणाम होंगे। भारत ने कश्मीर पर पाकिस्तान के दावों को खारिज करते हुए जम्मू-कश्मीर को भारत का अभिन्न हिस्सा बताया। भारतीय पक्ष ने पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर की स्थिति की ओर भी ध्यान दिलाया और पाकिस्तान के आतंकवाद संबंधी रिकॉर्ड पर सवाल उठाए।
सिंधु जल संधि को लेकर दोनों देशों में मतभेद
सिंधु जल संधि 1960 से भारत और पाकिस्तान के बीच नदी जल के बंटवारे से जुड़ा समझौता है। भारत ने अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद इस संधि को स्थगित रखने का फैसला किया था। भारत का कहना है कि यह स्थिति तब तक जारी रहेगी, जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ विश्वसनीय और ठोस कार्रवाई नहीं करता। वहीं पाकिस्तान लगातार संधि को बहाल करने की मांग कर रहा है।
संयुक्त राष्ट्र में शहबाज शरीफ के ताजा बयान के बाद पानी और कश्मीर को लेकर दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बयानबाजी एक बार फिर तेज हो गई है। फिलहाल दोनों देशों के बयानों के बीच मुख्य मुद्दे सिंधु नदी के पानी, कश्मीर और सीमा पार आतंकवाद को लेकर बने मतभेद हैं।

